![]() |
| Image by Google.com |
आज के दौर में शांति की जरूरत हर मनुष्य को है और वहीं शांति आपके भीतर से आये तो उससे अच्छी चीज क्या हो सकती है। तो इसी शांति का संदेश लेकर प्रेम रावतजी पूरे विश्व में भ्रमण करते है। वो ना केवल शांति की बात करते है बल्कि वो हर व्यक्ति को शांति का अनुभव भी कराते है उनके ज्ञान उपहार से जिनमें चार क्रियाएं शामिल है जो सरल तरीके से समझाते है। उनका ज्ञान किसी एक धर्म नहीं बल्कि कितने विभिन्न धर्म के लोगो ने ज्ञान पाकर उस आनंद का अनुभव किया है। उनका संदेश 100 से ज्यादा देश और 500 से ज्यादा सिटी में फैला हुआ है। 9 बिलियन से ज्यादा लोगो ने उनके संश से प्रेरणा पाकर अपने जीवन को सार्थक किया है। उनका संदेश शैक्षणिक संस्था और यूनिवर्सिटियों जैसे कि हारवर्ड, (यूएसए), ऑक्सफोर्ड (इंग्लैंड), बर्कले (यूएसए), ITI (इंडिया) और अंतर्राष्ट्रीय संगठन जैसे कि संयुक्त ऑस्टेलिया, अंतरराष्ट्रीय व्यापार मंच और रोटरी इंटरनेशनल आदि में उन्हें आमंत्रित किया गया है और भारत की जेलों की बात करे तो दिल्ली की तिहाड़ जेल, हैदराबाद कि चेरापल्ली जेल, पुणे की येरवडा जेल और लखनऊ की नारी बंदी निकेतन महिला जेल में वह स्वयं जाकर उनका शांति के संदेश दिया।
![]() |
| Image by Google.com |
अब बात करते है गुजरात की तो यहां 6 जेलों में उनके शांति शिक्षा कार्यक्रम के लिए प्रत्येक जेल में 12 दिन की मंजूरी मिली हुई है उनमें अहमदाबाद मध्यस्थ जेल, वडोदरा मध्यस्थ जेल, राजकोट मध्यस्थ जेल, लाजपोर मध्यस्थ जेल, भरूच जिला जेल और नवसारी जिला जेल शामिल है। तो अभी लाजपोर जेल सुरत में पिछले 20 जुलाई 2026 से शांति का उपहार दिखाया जा रहा है। जो अभी 31 जुलाई 2026 शांति का उपहार के 8 भाग समाप्त हो जायेगे ना केवल पुरुष कारागृह में बल्कि महिला कारागृह भी।
इन दिनों काफी शांतिपूर्वक माहौल बना रहा और जो टीम बनी थी उन्होंने भी जेलों के नियमों का पालन करते हुए प्रेम रावतजी का वीडियो संदेश सुनाया गया वो समय का पालन करते हुए। वहां के पुलिसकर्मी और स्टाफ का भी धन्यवाद करना चाहिए कैदियों के मानसिक विचार में सुधार हो इसलिए टीम को पूरा सहयोग दिया प्रशासन नीति नियमों का ध्यान रखते हुए। वहां समयसर प्रोग्राम हो और ना कैदियों ना टीम का टाइम बर्बाद हो ताकि इस 1 घंटे शांतिपूर्ण वातावरण में वह प्रोग्राम पूर्ण हो।
बात करे कैदियों की तो अभीतक 150 लोगो तक लाजपोर जेल सुरत में प्रेम रावतजी का संदेश पहुंच चुका है। हररोज करीब 50 से अधिक बन्दीभाई और 10 से ज्यादा महिला कैदियों ने भाग लिया। काफी शांतचित्त होकर वह प्रेम रावतजी को सुनते थे हा कुछ तीन चार लोग केंद्रित नहीं कर पाते होगे बाकी तो सब आगे बिलकुल प्रोजेक्टर करीब अपना स्थान ग्रहण कर लेते थे। कितनो का तो यहां तक कहना था कि जब यहां पर प्रेम रावतजी का वीडियो चलता था तो यहां का माहौल ही बदल जाता है। किसी एक बन्दीभाई की इतनी जिज्ञासा थी कि उससे प्रेम रावतजी के बारे में और जानना है इसलिए उन्होंने पुस्तक की मांग की है। इसलिए वहां पर लायब्रेरी में प्रेम रावतजी की पुस्तक रखी जाएगी। एक महिला कैदी ने इंग्लिश में सुनने की मांग की तो उन्हें अलग से छोटा सा वीडियो दिखाया गया। वहां ना केवल एक धर्म बल्कि अन्य धर्म के लोग भी सुनते है और तालियों से अपना आनंद व्यक्त करते है। क्योंकि उनका एक कारण यह भी है कि प्रेम रावतजी ने शांति का उपहार वीडियो सीरीज इतने सहज तरीके से बनाई है कोई भी व्यक्ति उसमें एकलिन होकर सुनता है। ये लोगों ने कभी प्रेम रावत नाम नहीं सुना था और आज उनको जान भी गये और उनके ज्ञान के इच्छुक बन गए। तो आशा तो यही है फिर से एकबार यहां ज्ञानसत्र हो और उनको ज्ञान का उपहार मिल सके, पहले भी यहां पर दो बार ज्ञान सत्र हो चुका है जिसमें 7 और दूसरी बार 29 लोगों को ज्ञान का उपहार मिल चुका है।


Comments
Post a Comment